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Saturday, 3 October 2020

अब कितना मौन रह ब

मोरबा के दाना देलह,
बत्तख के प्यार हो,
हमनी के न्याय दिलवा द,
हमनी के न्याय दिलवा द,
अब कितना मौन रह ब।

शासन प्रशासन सब ते अब धमकावे हो,
तोरे भरोसा बैठल बा हमर परिवार हो,
कुछू ते बोला द तू हू
अब कितना मौन रह ब।

तुहि त कहले रहा बेटी बचावा हो
वही सब के याद करके , हमरा बचावा हो
अब कितना मौन रह ब
कुछ हू त बोल द तू हू।

मोरबा के दाना देलह,
बत्तख के प्यार हो,
हमनी के न्याय दिलवा द,
हमनी के न्याय दिलवा द,
अब कितना मौन रह ब।
© Prince Kumar

#justice
#nomore

Sunday, 20 September 2020

हल्ला बोल हल्ला बोल

हल्ला बोल , हल्ला बोल


हल्ला बोल , हल्ला बोल
रोजगार के खातिर हल्ला बोल
मजदूर के खातिर हल्ला बोल
हल्ला बोल , हल्ला बोल
बबुआ रे तू हल्ला बोल
नौकरी के खातिर हल्ला बोल
हल्ला बोल , हल्ला बोल

किसान के खातिर ले ,
हल्ला बोल , हल्ला बोल
फसल के उचित मूल्य खातिर ले ,
हल्ला बोल , हल्ला बोल
किसानों के साथ में ,
हल्ला बोल , हल्ला बोल
मजदूरों के साथ में ,
हल्ला बोल , हल्ला बोल
अपने हक के खातिर ले बाबू हल्ला बोल
रे बबुआ हल्ला बोल , हल्ला बोल
रेलवे खातिर ले हल्ला बोल
निजीकरण पर , हल्ला बोल , हल्ला बोल
रे भैया हल्ला बोल , हल्ला बोल

गांव में फैक्ट्री के खातिर ले
हल्ला बोल , हल्ला बोल
हो चाचा हल्ला बोल
दादा - दादी के इलाज खातिर ले ,
अस्पताल के लिए हल्ला बोल
हो पापा हल्ला बोल , हल्ला बोल
मुन्नी के पढ़ाई खातिर स्कूल के लिए
हल्ला बोल , हल्ला बोल
बबुआ के कॉलेज खातिर ले हल्ला बोल
हो चाची हल्ला बोल ,हल्ला बोल

अपने - अपने अधिकार के खातिर ले
हल्ला बोल , हल्ला बोल
अच्छी शिक्षा , सबको शिक्षा के खातिर ले
हल्ला बोल , हल्ला बोल
देश के विकास के खातिर ले
हल्ला बोल , हल्ला बोल
एकता के जोर पर सब हल्ला बोल
हो चाचा हल्ला बोल , हो भैया हल्ला बोल
रे बबुआ हल्ला बोल
हल्ला बोल , हल्ला बोल।
©Prince Kumar


Friday, 18 September 2020

बेरोजगारी के ई कैसन काल चल रहल बा

  'बेरोजगारी के ई कैसन काल चल रहल बा '

बेरोजगारी के ई कैसन काल चल रहल बा
युवा लोगन पूछे ते , बोले मंदी चल रहल बा
रोजे - रोजे विद्यार्थी लोग मार्च कर रहल बा
रोजगार के खातिर ले पुलिस के डंडा खा रहल बा
बेरोजगारी के ई कैसन काल चल रहल बा


बड़ - बड़ लोगन के साथ दे रहल बा
गरीबन के खाली विकास सुना रहल बा
पूंजीपति के ई माला - माल कर रहल बा
मजदूर सब के कहे विकास हो रहल बा
बेरोजगारी के ई कैसन काल चल रहल बा
युवा लोगन पूछे ते , बोले मंदी चल रहल बा


रोजे - रोजे लईकन सुसाइड कर रहल बा
नौकरी के खातिर बलिदान दे रहल बा
मीडिया में बेरोजगारी के ना बात हो रहल बा
धीरे - धीरे देश के सम्पत्ति बिक रहल बा
आत्मनिर्भर भारत के ढोंग कर रहल बा
बेरोजगारी के ई कैसन काल चल रहल बा
युवा लोगन पूछे ते , बोले मंदी चल रहल बा
©Prince Kumar 



Saturday, 5 September 2020

एक ही नारा , एक ही आवाज़

एक ही नारा , एक ही आवाज़
रोजगार दो , रोजगार ...

जगह - जगह पर गूंजेगा बेरोजगारों की आवाज़
हर सड़क पर हर गली में युवा भरेंगे हुंकार

एक ही नारा , एक ही आवाज़
रोजगार दो , रोजगार ... 

                          Prince Kumar


Wednesday, 26 August 2020

'उन शौर्य वीर की गाथा आज हम तुम्हें सुनाते हैं'

 'उन शौर्य वीर की गाथा आज हम तुम्हें सुनाते हैं'


उन शौर्य वीर की गाथा आज हम तुम्हें सुनाते हैं
जिनकी वीरता से हमारा सीना गर्व से फूल गया
जिनके पराक्रम से उनको दुश्मन भी है नमन करते
जिसने अपने वतन के खातिर प्राण न्यौछावर कर दिये।


खुले आसमान में रहकर वो देश की सेवा थे कर रहे
ठंडी हो या , हो गर्मी , हो या फिर बरसात
अपने वतन की रक्षा करते थे दिन हो या रात ।




वो मां कितनी भाग्यशाली होगी
जिसने इनको जन्म दिये
एक मां की नहीं , वो करोड़ों मां का क़र्ज़ चुका गये।


वो पिता भी कितने धन्य होंगे
जिसने इनको पाला था
एक पिता नहीं , वो करोड़ों पिताओं का मान बढ़ा गये।


वो भाई कितने प्रतापी होंगे
जिसने इनको देश के नाम किये ।


वो बहन भी कितनी प्यारी होगी
जिसने इनके कलाई पे रक्षा का बंधन बांधी होंगी।


वो पत्नी भी कितनी साहसी होगी
जिसने इनको आरती और तिलक कर
देश रक्षा को भेजी होंगी।


हम सब भी कितने सौभाग्यशाली हैं
जो ऐसे वीर अनेकों हैं।

उन शौर्य वीर की गाथा आज हम तुम्हें सुनाते हैं
जिनकी वीरता से हमारा सीना गर्व से फूल गया
जिनके पराक्रम से उनको दुश्मन भी है नमन करते
जिसने अपने वतन के खातिर प्राण न्यौछावर कर दिये।
  ©Prince Kumar 
                           
                          Prince Kumar

Tuesday, 25 August 2020

दर्द - ए - दिल से तुझे याद करूं

' दर्द - ए - दिल से तुझे याद करूं '

दर्द - ए - दिल से तुझे याद करूं
तु है किसी और की फिर भी तुम्हें याद करूं
तुझे जीने का मक़सद बनाया था
हमें क्या पता था कि तुम ऐसे चली जाओगी
मेरे दिल में तो तेरी याद आयेगी
दर्द - ए - दिल से तुझे याद करूं
तु है किसी और की फिर भी तुम्हें याद करूं


तेरे हर सपनों को मैं रोज़ - रोज़ याद करूं
मेरे दिल में तेरी ही एक तस्वीर बनी
तेरे ख्वाबों को पूरा करने में
मैं दिन और रात रहता था
तेरे मासूम से चेहरे को मैं हर वक्त याद करूं
दर्द - ए - दिल से तुझे याद करूं
तु है किसी और की फिर भी तुम्हें याद करूं


मैंने तो तुमको ही दुनिया बना बैठा था
हमें ना पता था कि दुनिया बदल जायेगी
तुम मेरी हो के भी मुझसे यूं बिछड़ जाओगी
दर्द - ए - दिल से तुझे याद करूं
तु है किसी और की फिर भी तुम्हें याद करूं


तेरे यादों में यूं ही हम शायर ना हुये
मेरे जीने की एक भी वज़ह ना बची
तुम्हें भूलना पड़ेगा हमने सोचा ना था
मेरी जिंदगी अधूरी रह जायेगी हमने सोचा ना था
तुझे जीने का मक़सद बनाया था
हमें क्या पता था कि तुम ऐसे चली जाओगी
मेरे दिल में तो तेरी याद आयेगी
दर्द - ए - दिल से तुझे याद करूं
तु है किसी और की फिर भी तुम्हें याद करूं


                               
                                        Prince Kumar

तेरे मोहल्ले के कितने चक्कर लगाए

' तेरे मोहल्ले के कितने चक्कर लगाए'

तेरे मोहल्ले के कितने चक्कर लगाए
तेरे यादों में हम कितना रोयें
हम अपनी मुहब्बत जो तुमको माना
हमें ना पता था जो तुम ऐसी होगी


जब तुमने ऐसा सोचा होगा
तब तुम्हारे दिल में मेरी याद आयी तो होगी
तुम तो ऐसी ना थी
तुम तो मेरे पे मरने की बात कहती थी
तुम तो ऐसी ना थी - 2


तुमको तो तेरी सहेलियों की वो बातें
तो याद आयी होगी
तेरा एक्स्ट्रा क्लास का बहाना बनाकर
घर से निकलना
मेरे साथ अकेले वो घूमना अच्छा लगता था
ये सब तो तुमको याद आयी होगी
तेरे मोहल्ले के कितने चक्कर लगाए


जब तुमने उसके नाम की मेहंदी लगायी होगी
तुमको तो मेरी याद आयी होगी
मेहंदी की गीतों में,
तुमको जो मैंने गीत - ग़ज़लें सुनायी थी
याद आयी तो होगी


शादी के मंडप में जाने से पहले
मेरी याद आयी तो होगी
मंडप में बैठने से पहले डरी तो होगी
सात - फेरों में चलने से पहले
तुम्हें मेरी याद आयी तो होगी
सात - फेरों लगाने में पैर कांपे तो होंगे


तेरे मोहल्ले के कितने चक्कर लगाए
तेरी यादों में हम कितना रोये
हम अपनी मुहब्बत जो तुमको माना
हमें ना पता था जो तुम ऐसी होगी - 2
                      Prince Kumar

तुम सादगी की तरह याद आओगी

    ' तुम सादगी की तरह याद आओगी '

तेरा मिलना बातें करना
हँसकर यूं रुठ जाना
बहुत याद आयेगी
तुम सादगी की तरह याद आओगी।


वो सावन की बारिश
वो बारिश का पानी
वो बारिश के पानी में हमारा मिलना
वो रिमझिम बारिश में तेरा मचलना
तेरे हाथों से बारिश के पानी को यूं छलकाना
बहुत याद आयेगी
तुम सादगी की तरह याद आओगी


तेरी एक झलक के खातिर मैंने
तेरे मोहल्ले के कितने चक्कर लगाए
तुम्हारे छत पे नज़रे गराना
तेरा निकलने का इंतजार करना
अपना वो नज़रों - ए - नज़रे में बातें करना
तुम्हारा वो हँसकर के जाने को कहना
मेरे से पहले वो तेरा हँसकर छत से जाना
तेरे जाने के बाद भी
तेरे छत को निहारना
बहुत याद आयेगी
तुम सादगी की तरह याद आओगी


फूलों की तरह खिला तेरा चेहरा
मोती की तरह तेरी चमकती आंखें
बहुत याद आयेगी
क्या तुम्हें भी मेरी याद आयेगी
क्या तुम भी मेरे बारे में इतना सोचती होगी


तेरा मिलना बातें करना
हँसकर यूं रुठ जाना
बहुत याद आयेगी
तुम सादगी की तरह याद आओगी।


                            Prince Kumar

Thursday, 2 July 2020

धरती Dharti

                     धरती 


धरती हमारी जननी है
धरती है हमारी पालनहार ,
ये करती हमारी देखभाल ।
आओं मिलकर प्रण करें ,
धरती को हरी - भरी और खुशहाल बनाए।

इसके गोद में हमने देखा ,
देखा पूरा संसार - 2
इसके गोद में हमने खेला ,
हमने खेल हजार - 2
अपने बच्चों से करती बेहिसाब प्यार ।
आओं मिलकर प्रण करें ,
धरती को हरी - भरी और खुशहाल बनाए।

पशु- पक्षियां मिलकर रहते
धरती करती इनकी देखभाल ,
पक्षियों की ध्वनि प्यारी ,
धरती के ये शोभा बढ़ाते ।
आओं मिलकर प्रण करें ,
धरती को हरी - भरी और खुशहाल बनाए।

किसानों की तुम्हीं सहारा
तुम्हीं इसकी पालनहार ,
तुम्हीं इसकी रक्षक हो ,
किसान अपने मेहनत से
इस पे हैं फसल लगते ,
फसल की हरियाली से
धरती खुश हो जाती ।
आओं मिलकर प्रण करें ,
धरती को हरी - भरी और खुशहाल बनाए।

आओं मिलकर प्रण करें ,
सब मिलकर अब पेड़ लगाए
पर्यावरण को शुद्ध करे
धरती को हरी - भरी और खुशहाल बनाए - 2

                      Prince Kumar

Friday, 26 June 2020

Corona कोरोना

कोरोना महामारी ने ,
हम जन - मानस को यह बताया ।
तुम मनुष्य ने प्रकृति से ,
इस तरह है नाता तोड़ा ।।
तुमने यह भी ना सोचा , कि तुम्हारी बुद्धि महान है - 2


तुमने तो यह भी ना सोचा ,
कि इस धरती के तुम ,
अकेले नहीं हकदार हो ।
फिर भी तुमने छोटे - छोटे
जीव - जन्तु पे किया आत्याचर है ।।
तुमने यह भी सोचा ,
कि तुम्हारी बुद्धि महान है।


तुमने कानन है इस तरह काट दिए
कि गर्मी से व्याकुल हो ,
तुमने तो आलीशान महल बनाया
जंगल काट तुमने फैक्ट्रियां लगाई ।
तुमने अपने स्वाद के लिए
छोटे जीव को आहार बनाया ।।
तुमने यह भी ना सोचा ,
कि तुम्हारी बुद्धि महान है।


बहुत दिनों बाद हमने देखा
शुद्ध हवा धरती पे चली ।
जब तुम डर से अंदर थे ,
बेखौफ घूम रहे ये जीव - जन्तु बाहर थे ।।
तुमने यह भी ना सोचा ,
कि तुम्हारी बुद्धि महान है।


हमने तुमको यह बतलाया ,
करों ना जीव - जन्तु पे आत्याचार ,
यही जीव - जन्तु ने सिखाया है तुमको ,
इस दुनिया में रहने का संस्कार ।
तुम अपनी आदतें सुधारों ,
गन्दगी ना फैलाओ ।।
 
                       Prince Kumar

Saturday, 20 June 2020

Father's day ❤️❤️

आपका डांटना भी अच्छा ,
आपका गुस्सा में प्यार भी अच्छा,
और हमारे मंजिल के उड़ान को ,
अपने जो पंख दिया वो भी अच्छा,
आपने जो भी दिया हमें वो सब कुछ अच्छा ,
         आप पिता हैं ।

Prince Kumar

Monday, 11 May 2020

नर्स Nurse

अपने घरों की चिंता छोड़,
सेवा करती हमारी रोज ,
मदर टेरेसा के रूप में,
आयी है दुनिया की ओर ।

                         प्रिंस कुमार


Friday, 8 May 2020

Journey of IAS Aspirants


जब निकलता है बड़ों का आशीर्वाद लेकर
और आंखों में सपना लेकर ,
ट्रेन में बैठकर निकल जाता है मंज़िल पाने को
जब पहुंचता है सपनों कि दुनिया में ,
तो देख खो सा जाता है।

फिर मिलता है कुछ लोगों से
उसमें से कुछ बन जाते हैं बेस्ट फ्रेंड्स ,
दोस्तों के साथ मिलकर लग जाता है
पढ़ाई में दिन और रात।

जब कभी लगता है हमसे ना हो पाएगा
तो याद आ जाता है मां पापा का चेहरा ,
और वह एक पापा का कॉल
जो अंदर एक आग सी जला देती,
तब फिर लग जाता है अपना रुटीन को पूरा करने में।

अब कुछ दिन बाद आ जाता है उसका एग्जाम
उस एग्जाम में गिर जाता है,
खड़ा हो फिर लग जाता है अपनी मेहनत कर दोगुनी
क्योंकि हारना उसकी फितरत नहीं ।

तब जाकर मिलती है सफलता उसको ,
बड़ी मुश्किलों के बाद
सब मिलकर खुशी से मनाते उसके सफलता का त्यौहार ।

                               

                               #princekumar
                                  10/02/2020
             





Sunday, 3 May 2020

खोना

ना जाने क्यूं ऐसा ख़्याल आता है,

लाइफ में कुछ खोने का डर सा लगा रहता है,

फिर सोचता हूं क्यूं डरूं किसके लिए डरूं,

इसलिए तो कहा गया है ,

कुछ पाने के कुछ खोना पड़ता है।


जनाब


किसी ने पूछ लिया किधर चलते हो जनाब,

मैंने मुस्कुराते हुए कह दिया,

चल रहे हैं अपने मंजिल की ओर जनाब।


सपनों का मंज़िल


यूं ही नहीं मिलती राही को मंज़िल,

छोटी सी पगडंडी से लेकर,

टूटे सड़को पे चलनी पड़ती है ,

तब कहीं जाकर सपनों की मंजिल मिलती है ।


मजबूत इरादा और हौसला


चलती हवा के कानों में जलती मोमबत्ती ने यूं कहा,

मेरे मज़बूत इरादों और हौसलों के आगे,

तू ए हवा कुछ भी नहीं ।



Friday, 1 May 2020

मां

सुबह की पहली किरण सी लगती है,
रात की चांद की ठंडक सी लगती है,
एक मां ही तो है जो अपनी सी लगती है।

Thursday, 30 April 2020

बारिश

धरती के गरमाहट को ,
इस कदर ये शांत करे ,
पेड़- पोधे भी खूब मुस्कुराए ,
इसके पानी के बूंदों से।
पता नहीं ये क्या खाती है,
धरती को हरी- भरी और खुशहाली बनाती है ।

फूलों भी अब चहक उठी,
इसकी कोमल स्पर्शो से ,
जब इनको गुस्सा आता,
तो अपने संग ये हवा को लाता,
उस दिन ये क्षति पहुंचाती,
जन - मानस को उसकी गलती बतलाती ।
पता नहीं ये क्या  खाती है,
धरती को हरी - भरी और खुशहाली बनाती है।

नहा - धोकर इस धरती को,
अब अपने घर को चली ,
इसके बाद आता है इन्द्रधनुष,
इन्द्रधनुष के सात रंगों से,
चमक उठी ये धरती ।
पता नहीं ये क्या खाती है,
धरती को हरी - भरी और खुशहाली बनाती है।




Friday, 24 April 2020

कभी होटल में किया था काम और आज है एक youngest IAS OFFICER .

संसाधन महत्व नहीं रखता है , 
साध्य महत्व रखता है ।
अंसार शेख , आईएएस 
मेरा जन्म महाराष्ट्र के जलना में शैलगांव ग्राम में हुआ।
वहीं मेरा देख- रेख हुआ। मेरा परिवार बहुत ही गरीब और वंचित था। मेरे पिताजी घर चलाने के लिए ऑटो- रिक्शा चलाया करते थे और मेरी मां एक गृहिणी थी। मेरे तीन और भाई- बहन भी थे। मुझे बहुत सारी कठिनाई का सामना करना पड़ा। मैं पढ़ाई में ठीक था इसलिए मैं पढ़ाई करता रहा। मेरी स्कूली शिक्षा गांव के ही एक सरकारी स्कूल में हुई। मैंने 10वी वहीं से 76.20 प्रतिशत से की। फिर आगे की पढ़ाई के लिए मैं बद्रीनारायण बरवाले कॉलेज , जलना चला गया। इसी समय मैंने पुणे जाकर UPSC की परीक्षा की तैयारी करने के बारे में सोचा था। मैं मानविकी में 11वी और 12वी क्लास की पढ़ाई की। मैंने 91.50 प्रतिशत अंकों से 12वी पास किया। उसके बाद मैंने फुगर्यूशन कॉलेज , पुणे में बी ए राजनीति विज्ञान में दाखिला लिया। मैंने अपने कॉलेज दूसरे ही साल यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग शुरू कर दी क्योंकि मेरे पास समय ज्यादा नहीं था। मैंने जून 2015 में 73 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। उसी साल अगस्त में , मैंने यूपीएससी का प्रिलिम्स दिया और पास भी कर ली। मैंने हमेशा कठिन परिश्रम किया। क्यूंकि मेरी आर्थिक स्थिति भी उतनी इतनी अच्छी नहीं थी इसलिए मुझे बहुत सारी बाधाओं का भी सामना करना पड़ता था। मेरे जीवन में ऐसा भी समय आया जब पूरे दिन भूखे रहना पड़ता था। जब मुझे किताब खरीदने के लिए पैसों की जरूरत पड़ी तो मैंने कुछ कुछ काम भी किया। मैंने यह परीक्षा मराठी माध्यम में दिया जो की मेरे लिए बहुत कठिन था क्योंकि 60 प्रतिशत से अधिक सिलेब्स मुझे इंग्लिश में पढ़कर उसे मराठी में अनुवाद करना पड़ता था। मैं जब 10वी में ही था तभी आईएएस बनने का सोच लिए था। इसमें स्कूल के  एक शिक्षक का भी बहुत योगदान है वहीं मुझे  आईएएस के बारे में  बताए थे। और उसी साल मेरे एक शिक्षक ने महाराष्ट्र पीएससी की परीक्षा भी पास की थी। मेरा प्रेरणा भी यही था। मुझे तो पहले ही मौका में सफलता मिल गई थी। लेकिन बहुत सारे  स्टूडेंट का नहीं हो पाता है। इससे आप कमजोर मत हो। इसे अपना मजबूती बनाए। और हमेशा आगे बढ़ते रहे ।
जब मैं कर सकता हूं तो आप क्यू नहीं ?  

Wednesday, 22 April 2020

नींद


कृष्ण पक्ष की अंधेरी रातों में , 
नयन ज्योति सा चमक रही ,
मुखरा जैसे चांद टुकड़ा ,
प्यारा सा , शीतलता सा ,
हमें कोमलता से सुलाए चले ।

Stay home stay safe





मंज़िल मिल ही जाएगी,
भटकते हुए सही,
गुमराह तो वो हैं,
जो घरों से निकलते हैं अभी।

कविता यूं ही नहीं डरेंगे हम

यूं ही नहीं डरेंगे हम ,-2
हम वो धूल नहीं , जो यूं ही उर जायेंगे -2
हम तो वो फौलाद हैं , जो आसमां को भी झुका देंगे ।
यूं ही नहीं डरेंगे हम।

जब जब तुम्हारा अन्याय बढ़ेगा ,
तब तब हमारा आवाज़ उठेगा ,
हम लड़ेंगे , हम नहीं झुकेंगे,
यूं ही नहीं डरेंगे हम।

हम अंग्रेजी शासन नहीं चलने देंगे , 
अगर तुम लाओगे अंग्रेज़ काल ,
तो हम करेंगे उसका खिलाफ , 
यूं ही नहीं डरेंगे हम।

तुम धर्म , जाति में बाटोगे -2
हम एक होकर दिखाएंगे ,
हम तुम्हारे बहकावे में, यूं ही नहीं आएंगे 
हम एक थे , एक रहेंगे ।

जब जब तुम्हारा अन्याय बढ़ेगा ,
तब तब हमारा आवाज़ उठेगा,
हम लड़ेंगे , हम नहीं झुकेंगे 
यूं ही नहीं डरेंगे हम-2

वक्त

वक्त मत गंवाओ ,
करो वक्त की कद्र ,
इसे मत गंवाओ ,
सब कुछ मिल जाएगा ,
इसे मत गंवाओ ।
                        @Kumar Prince 

Motivation

आसमां को झुकाने हम चले ,
नई बुलंदियों को पाने हम चले ,
भरोसा है खुद पर मुझे ,
यूं ही नही तुफानो से बाजी लगाने हम चले ।

विचारधारा

यह जीवन है एक चांद का टुकड़ा
अपनों का यह प्यारा मुखड़ा
इतना न्यारा की तारों सा प्यारा
मां का खूब दुलारा मुखड़ा
दुनिया का गवारा मुखड़ा
अपना एक सहारा मुखड़ा
कुछ पन्नों में सिमट कर बैठा
अच्छे दिनों की यादों में
काली रातों की परछाई में
उड़ने चाहत रखता
पता नहीं कब आग लगी
प्यारे दिन के उन सपनों पे
भूल गए अब अच्छे दिन
मां के खूब दुलारे दिन
बीत गए कब वे दिन
अब अंधियारी की बारी आई
मंज़िल का पीछा करते - करते
किशती भी अब टूट गई
कुछ बातों को सीखा हमने
यह जीवन नाव और धारा है
जो समझ गया वो निकल गया
जो फिसल गया वो डूब गया
यह जीवन है एक चांद का टुकड़ा
अपनों का यह प्यारा मुखड़ा -2

लक्ष्य

लक्ष्य है कुछ बड़ा करूं,
पथ की ओर बढ़ा करूं
छोटे - छोटे लक्ष्यों से ,
एक बड़ा लक्ष्य तय किया करूं
अपने मेहनत के रंगों से ,
एक नए युग का गठन करूं
वह जीवन इतना प्यारा हो ,
जिसमें दुःख का अंश ना हो
जीवन मेरा ऐसा हो ,
जो मानवता का घ्योतक हो
महावीर हम ना ही सही ,
एक मनुष्य बनकर दिखलाएंगे
अपने उच्च आदर्शो से ,
सबका जीवन धन्य करे
और अपने कुछ कर्मो से ,
माँ का आँचल तृप्त करे
आओ मिलकर प्रण करे ,
ऐसे समाज का गठन करे
एक नए युग की ओर चले ,
अच्छे विचार उत्पन्न करे
छोटे - छोटे लक्ष्यों से ,
एक बड़ा लक्ष्य तय किया करूं
लक्ष्य है कुछ बड़ा करूं ,
पथ की ओर बढ़ा करूं -2

मां का आंचल

चन्दा की कोमलता से भी कोमल ,
दुनिया की झंझट में भी शांत ,
वह मां का आंचल ही है जो हर खुशियां देती है बेशूमार ।