जब निकलता है बड़ों का आशीर्वाद लेकर
और आंखों में सपना लेकर ,
ट्रेन में बैठकर निकल जाता है मंज़िल पाने को
जब पहुंचता है सपनों कि दुनिया में ,
तो देख खो सा जाता है।
फिर मिलता है कुछ लोगों से
उसमें से कुछ बन जाते हैं बेस्ट फ्रेंड्स ,
दोस्तों के साथ मिलकर लग जाता है
पढ़ाई में दिन और रात।
जब कभी लगता है हमसे ना हो पाएगा
तो याद आ जाता है मां पापा का चेहरा ,
और वह एक पापा का कॉल
जो अंदर एक आग सी जला देती,
तब फिर लग जाता है अपना रुटीन को पूरा करने में।
अब कुछ दिन बाद आ जाता है उसका एग्जाम
उस एग्जाम में गिर जाता है,
खड़ा हो फिर लग जाता है अपनी मेहनत कर दोगुनी
क्योंकि हारना उसकी फितरत नहीं ।
तब जाकर मिलती है सफलता उसको ,
बड़ी मुश्किलों के बाद
सब मिलकर खुशी से मनाते उसके सफलता का त्यौहार ।
10/02/2020


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