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Thursday, 30 April 2020

बारिश

धरती के गरमाहट को ,
इस कदर ये शांत करे ,
पेड़- पोधे भी खूब मुस्कुराए ,
इसके पानी के बूंदों से।
पता नहीं ये क्या खाती है,
धरती को हरी- भरी और खुशहाली बनाती है ।

फूलों भी अब चहक उठी,
इसकी कोमल स्पर्शो से ,
जब इनको गुस्सा आता,
तो अपने संग ये हवा को लाता,
उस दिन ये क्षति पहुंचाती,
जन - मानस को उसकी गलती बतलाती ।
पता नहीं ये क्या  खाती है,
धरती को हरी - भरी और खुशहाली बनाती है।

नहा - धोकर इस धरती को,
अब अपने घर को चली ,
इसके बाद आता है इन्द्रधनुष,
इन्द्रधनुष के सात रंगों से,
चमक उठी ये धरती ।
पता नहीं ये क्या खाती है,
धरती को हरी - भरी और खुशहाली बनाती है।




Friday, 24 April 2020

कभी होटल में किया था काम और आज है एक youngest IAS OFFICER .

संसाधन महत्व नहीं रखता है , 
साध्य महत्व रखता है ।
अंसार शेख , आईएएस 
मेरा जन्म महाराष्ट्र के जलना में शैलगांव ग्राम में हुआ।
वहीं मेरा देख- रेख हुआ। मेरा परिवार बहुत ही गरीब और वंचित था। मेरे पिताजी घर चलाने के लिए ऑटो- रिक्शा चलाया करते थे और मेरी मां एक गृहिणी थी। मेरे तीन और भाई- बहन भी थे। मुझे बहुत सारी कठिनाई का सामना करना पड़ा। मैं पढ़ाई में ठीक था इसलिए मैं पढ़ाई करता रहा। मेरी स्कूली शिक्षा गांव के ही एक सरकारी स्कूल में हुई। मैंने 10वी वहीं से 76.20 प्रतिशत से की। फिर आगे की पढ़ाई के लिए मैं बद्रीनारायण बरवाले कॉलेज , जलना चला गया। इसी समय मैंने पुणे जाकर UPSC की परीक्षा की तैयारी करने के बारे में सोचा था। मैं मानविकी में 11वी और 12वी क्लास की पढ़ाई की। मैंने 91.50 प्रतिशत अंकों से 12वी पास किया। उसके बाद मैंने फुगर्यूशन कॉलेज , पुणे में बी ए राजनीति विज्ञान में दाखिला लिया। मैंने अपने कॉलेज दूसरे ही साल यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए कोचिंग शुरू कर दी क्योंकि मेरे पास समय ज्यादा नहीं था। मैंने जून 2015 में 73 प्रतिशत अंकों के साथ ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। उसी साल अगस्त में , मैंने यूपीएससी का प्रिलिम्स दिया और पास भी कर ली। मैंने हमेशा कठिन परिश्रम किया। क्यूंकि मेरी आर्थिक स्थिति भी उतनी इतनी अच्छी नहीं थी इसलिए मुझे बहुत सारी बाधाओं का भी सामना करना पड़ता था। मेरे जीवन में ऐसा भी समय आया जब पूरे दिन भूखे रहना पड़ता था। जब मुझे किताब खरीदने के लिए पैसों की जरूरत पड़ी तो मैंने कुछ कुछ काम भी किया। मैंने यह परीक्षा मराठी माध्यम में दिया जो की मेरे लिए बहुत कठिन था क्योंकि 60 प्रतिशत से अधिक सिलेब्स मुझे इंग्लिश में पढ़कर उसे मराठी में अनुवाद करना पड़ता था। मैं जब 10वी में ही था तभी आईएएस बनने का सोच लिए था। इसमें स्कूल के  एक शिक्षक का भी बहुत योगदान है वहीं मुझे  आईएएस के बारे में  बताए थे। और उसी साल मेरे एक शिक्षक ने महाराष्ट्र पीएससी की परीक्षा भी पास की थी। मेरा प्रेरणा भी यही था। मुझे तो पहले ही मौका में सफलता मिल गई थी। लेकिन बहुत सारे  स्टूडेंट का नहीं हो पाता है। इससे आप कमजोर मत हो। इसे अपना मजबूती बनाए। और हमेशा आगे बढ़ते रहे ।
जब मैं कर सकता हूं तो आप क्यू नहीं ?  

Wednesday, 22 April 2020

नींद


कृष्ण पक्ष की अंधेरी रातों में , 
नयन ज्योति सा चमक रही ,
मुखरा जैसे चांद टुकड़ा ,
प्यारा सा , शीतलता सा ,
हमें कोमलता से सुलाए चले ।

Stay home stay safe





मंज़िल मिल ही जाएगी,
भटकते हुए सही,
गुमराह तो वो हैं,
जो घरों से निकलते हैं अभी।

कविता यूं ही नहीं डरेंगे हम

यूं ही नहीं डरेंगे हम ,-2
हम वो धूल नहीं , जो यूं ही उर जायेंगे -2
हम तो वो फौलाद हैं , जो आसमां को भी झुका देंगे ।
यूं ही नहीं डरेंगे हम।

जब जब तुम्हारा अन्याय बढ़ेगा ,
तब तब हमारा आवाज़ उठेगा ,
हम लड़ेंगे , हम नहीं झुकेंगे,
यूं ही नहीं डरेंगे हम।

हम अंग्रेजी शासन नहीं चलने देंगे , 
अगर तुम लाओगे अंग्रेज़ काल ,
तो हम करेंगे उसका खिलाफ , 
यूं ही नहीं डरेंगे हम।

तुम धर्म , जाति में बाटोगे -2
हम एक होकर दिखाएंगे ,
हम तुम्हारे बहकावे में, यूं ही नहीं आएंगे 
हम एक थे , एक रहेंगे ।

जब जब तुम्हारा अन्याय बढ़ेगा ,
तब तब हमारा आवाज़ उठेगा,
हम लड़ेंगे , हम नहीं झुकेंगे 
यूं ही नहीं डरेंगे हम-2

वक्त

वक्त मत गंवाओ ,
करो वक्त की कद्र ,
इसे मत गंवाओ ,
सब कुछ मिल जाएगा ,
इसे मत गंवाओ ।
                        @Kumar Prince 

Motivation

आसमां को झुकाने हम चले ,
नई बुलंदियों को पाने हम चले ,
भरोसा है खुद पर मुझे ,
यूं ही नही तुफानो से बाजी लगाने हम चले ।

विचारधारा

यह जीवन है एक चांद का टुकड़ा
अपनों का यह प्यारा मुखड़ा
इतना न्यारा की तारों सा प्यारा
मां का खूब दुलारा मुखड़ा
दुनिया का गवारा मुखड़ा
अपना एक सहारा मुखड़ा
कुछ पन्नों में सिमट कर बैठा
अच्छे दिनों की यादों में
काली रातों की परछाई में
उड़ने चाहत रखता
पता नहीं कब आग लगी
प्यारे दिन के उन सपनों पे
भूल गए अब अच्छे दिन
मां के खूब दुलारे दिन
बीत गए कब वे दिन
अब अंधियारी की बारी आई
मंज़िल का पीछा करते - करते
किशती भी अब टूट गई
कुछ बातों को सीखा हमने
यह जीवन नाव और धारा है
जो समझ गया वो निकल गया
जो फिसल गया वो डूब गया
यह जीवन है एक चांद का टुकड़ा
अपनों का यह प्यारा मुखड़ा -2

लक्ष्य

लक्ष्य है कुछ बड़ा करूं,
पथ की ओर बढ़ा करूं
छोटे - छोटे लक्ष्यों से ,
एक बड़ा लक्ष्य तय किया करूं
अपने मेहनत के रंगों से ,
एक नए युग का गठन करूं
वह जीवन इतना प्यारा हो ,
जिसमें दुःख का अंश ना हो
जीवन मेरा ऐसा हो ,
जो मानवता का घ्योतक हो
महावीर हम ना ही सही ,
एक मनुष्य बनकर दिखलाएंगे
अपने उच्च आदर्शो से ,
सबका जीवन धन्य करे
और अपने कुछ कर्मो से ,
माँ का आँचल तृप्त करे
आओ मिलकर प्रण करे ,
ऐसे समाज का गठन करे
एक नए युग की ओर चले ,
अच्छे विचार उत्पन्न करे
छोटे - छोटे लक्ष्यों से ,
एक बड़ा लक्ष्य तय किया करूं
लक्ष्य है कुछ बड़ा करूं ,
पथ की ओर बढ़ा करूं -2

मां का आंचल

चन्दा की कोमलता से भी कोमल ,
दुनिया की झंझट में भी शांत ,
वह मां का आंचल ही है जो हर खुशियां देती है बेशूमार ।