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Wednesday, 22 April 2020

कविता यूं ही नहीं डरेंगे हम

यूं ही नहीं डरेंगे हम ,-2
हम वो धूल नहीं , जो यूं ही उर जायेंगे -2
हम तो वो फौलाद हैं , जो आसमां को भी झुका देंगे ।
यूं ही नहीं डरेंगे हम।

जब जब तुम्हारा अन्याय बढ़ेगा ,
तब तब हमारा आवाज़ उठेगा ,
हम लड़ेंगे , हम नहीं झुकेंगे,
यूं ही नहीं डरेंगे हम।

हम अंग्रेजी शासन नहीं चलने देंगे , 
अगर तुम लाओगे अंग्रेज़ काल ,
तो हम करेंगे उसका खिलाफ , 
यूं ही नहीं डरेंगे हम।

तुम धर्म , जाति में बाटोगे -2
हम एक होकर दिखाएंगे ,
हम तुम्हारे बहकावे में, यूं ही नहीं आएंगे 
हम एक थे , एक रहेंगे ।

जब जब तुम्हारा अन्याय बढ़ेगा ,
तब तब हमारा आवाज़ उठेगा,
हम लड़ेंगे , हम नहीं झुकेंगे 
यूं ही नहीं डरेंगे हम-2

3 comments:

  1. Plzzz read,like and share
    Thank you

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  2. बहुत ही बढ़िया कविता ।। तारीफ-ऐ-काबिल ।।
    मृत्युंजय

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